राष्ट्रपति ने कहा है कि विश्व क़ुद्स दिवस के जुलूसों में व्यापक उपस्थिति का अर्थ फ़िलिस्तीन की अत्याचारग्रस्त जनता का अधिक समर्थन और ज़ायोनी शासन के अतिक्रमण, जनसंहार और अतिग्रहण की समाप्ति है।
डाक्टर हसन रूहानी ने रमज़ान के पवित्र महीने के अंतिम शुक्रवार अर्थात विश्व क़ुद्स दिवस से पहले इस बात का उल्लेख करते हुए कि यह दिन धार्मिक दृष्टि से भी और क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों की दृष्टि से भी ईरानी जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, कहा कि विश्व क़ुद्स दिवस के जुलूसों में जनता की भागीदारी, स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के आदेशों का पालन भी है और संसार के समक्ष इस बात की घोषणा भी है कि मस्जिदुल अक़सा मुसलमानों का पहला क़िबला और फ़िलिस्तीन की धरती उनके लिए पवित्र है अतः वे कभी भी इस धरती और बेघर कर दिए गए फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को नहीं भूलेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि लोग, इन जुलूसों में भाग लेकर यह दर्शाएंगे कि अत्याचार व अतिग्रहण सदा बाक़ी नहीं रह सकता और जो राष्ट्र अपनी धरती की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करता है अंततः विजय उसी की होती है। डाक्टर रूहानी ने कहा कि फ़िलिस्तीन की मुसलमान जनता कई वर्षों से ज़ायोनियों के परिवेष्टन में है और आज रोज़े की स्थिति में इस क्रूर शासन के हमलों से अपनी रक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि 65 वर्षों से संघर्ष करने वाली फ़िलिस्तीनी जनता ही विजयी होगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि ईरानी राष्ट्र सदैव फ़िलिस्तीन की अत्याचारग्रस्त जनता के साथ है और हमें आशा है कि शीघ्र ही अतिक्रमणकारियों के मुक़ाबले में उसे विजय प्राप्त होगी।
ज्ञात रहे कि इमाम ख़ुमैनी ने १९७९ में अगस्त के आरंभ में १३ रमज़ान को ज़ायोनी शासन के चुंगल से फ़िलिस्तीनियों की भूमि विशेषकर बैतुल मुक़द्दस को स्वतंत्र कराने के लिए रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस के रूप में मनाए जाने घोषणा की थी। इस दिन पूरे संसार में फ़िलिस्तीनियों के समर्थन और ज़ायोनी शासन की निंदा में जुलूस निकाले जाते हैं।
22 जुलाई 2014 - 17:43
समाचार कोड: 625950
राष्ट्रपति ने कहा है कि विश्व क़ुद्स दिवस के जुलूसों में व्यापक उपस्थिति का अर्थ फ़िलिस्तीन की अत्याचारग्रस्त जनता का अधिक समर्थन और ज़ायोनी शासन के अतिक्रमण, जनसंहार और अतिग्रहण की समाप्ति है।